BLOGGER TEMPLATES AND TWITTER BACKGROUNDS »

Tuesday, May 19, 2009

परछाई

क्या क्या कहूँ उनके बारे में
वो ज्योत है मेरी आंखों की,
बस फर्क सिर्फ़ इतना है की अब वो ज्योत
उनके प्यार से नही आंसू से जलती है।

क्या क्या कहूँ उनके बारे में
वो सर्वस्व हा मेरे जीवन में,
बस फर्क सिर्फ़ इतना है की अब वह जीवन क्या
सुबह शाम उनकी यादों में ढलती है।

मेरा स्वाभिमान, मेरा आत्मविश्वास
मेरा हौसला, मेरी पहली और अन्तिम इच्छा,
बस फर्क सिर्फ़ इतना है की वो सब कुछ
जले हुए मोम की तरह पिघलती है।

उनका छूना, गले से लगाना
प्यार करना, वो अनमोल पल थे,
बस फर्क सिर्फ़ इतना है की अब ये बातें
मेरी कविताओं में ही मिलती है।

वो शाम जो उनके साथ बिताई
वो दिन जो उनके साथ गुजरें,
हर पल, सब कुछ, बस फर्क इतना ही है की
वो ना जाने क्यों सब कुछ भूल जाते है..

No comments:

Post a Comment