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Sunday, April 26, 2009

रिश्वत की इस दुनियाँ में मौत न रिश्वत लेती है,
वह भी लेती रिश्वत अगर कफ़न की जेब होती है,
काटे जाते है इंसान भेड़- बकरी की तरह यहाँ,
घर में बैठी माँ-बहन अकुडाकर, भीगे लोचन रोती है.
सारी दुनियाँ में एक ही नाम आता है,
हर युवक और बच्चा इससे घबराता है,
जहाँ देखो काले बादल नीर काला हो जाता है,
काँप जाती है दुनियाँ जहाँ भ्रस्ताचार आ जाता है,
जंजीर से सिकुड़ा भारत क्या करे अकेला,
इस जंजीर का नाम आतंकवाद कहलाता है.
आंखों में तस्वीर होठों पे जाम होता है,
ये किस्सा हर जगह खुले आम होता है,
पीने के तो लाखों बहाने है सबके,
मगर मैखाना ही बदनाम होता है.

Monday, April 20, 2009

ग़म-ऐ-जुदाई जालिम मक्बूर कर जाती है,

रहनुमां हो खुदाई, रुसवाई मुकद्दर का काफ़िला

सोज़ की लोह पर जालिम क्या कर गुजरते है,

तबस्सुम बन परवाज़ ये मेरे इश्क का सिला.

उल्फत-ऐ-करार आ जाता है दिल को,

जब बोतल सी नाचती तू मेरी आँख पर,

पीना तो नही चाहते साकी मैखाने को हम,

पर क्या करे जालिम काबू नही रहता तेरी याद पर.

सब कुछ खो दिया तुम्हे पाने में,
सब भूल जाते तेरी याद आने में,
पता नही क्या कुछ गंवाया हमने,
याद आई हर याद तुझे भुलाने में.

गुमनाम हस्तियाँ आती है कब्र-ऐ-जायजे को,

कहती है जरूर कोई अश्क जला होगा,

न जाने क्यूँ शमा रोती है ख़ुद पर,

मुझे लगता है वहाँ कोई दर्द पला होगा.

कठिन थे वो पल तुम्हारे बिना,
कठिन थी वो यादें तुम्हारे बिना,
हर दिन था अकेला हर शाम थी सूनी,
मानो सब कुछ है बेकार तुम्हारे बिना,
कहना था बहुत कुछ पर कह न पाये,
शब्द भी जुबाँ पर न आ सके तुम्हारे बिना.

Sunday, April 19, 2009

सब क्या जाने ज़िन्दगी कितनी उदास होती है,

दूर होकर भी पास की आस होती है,

वो क्या जाने पानी का स्वाद होता क्या है,

प्यासे से पूछो क्या प्यास होती है.

दिल दिया गल्ला सहा नही जाए,

अब तो तुझ बिन रहा नही जाए,

साँसें चलती नाम पे तेरे,

ये दर्द भी अब कहा नही जाए.

इश्क वह कर सकता है जो सह सकता हो,

दर्द में भी रह सकता हो,

मांग सके उनकी खुशी रब से,

प्यार करते है उनको, ये कह सकता हो.

तेरी हर उम्मीद को पूरा करने की ख्वाहिश है,

तेरे चहरे पर खुशी की आरजू है,

हर लम्हा बैठो मेरे सामने,

ज़िन्दगी में यही एक जुस्तजू है,

प्यार करना कैसे छोड़ दूँ तुम्हे ये बता,

चाहत तो कल भी थी आज भी शुरू है.

Thursday, April 16, 2009

आए थे हमसे मिलने, हम न मिले तो,

हमारी बेखुदियों से मुलाक़ात कर गए,

हम उम्र भर न दे सके कोई जवाब,

वो पल भर में इतने सवालात कर गए.

मुझे भूल जाने का वादा करो,

ये ख्वाहिश थी उनकी जो पूरी कर दी,

एक बार भी न सोचा हमारा क्या होगा,

बस दामन छोड़ा और ज़िन्दगी अधूरी कर दी.

वो खूब थी ज़िन्दगी जब हम दीवाने हुआ करते थे,
अब तो सिर्फ़ दीवानों को देखते है
जी करता है जाकर कह दूँ उन सब को की,
कभी मेरे हाल से भी डर जाओ यारों.