कोई रात पूनम तो कोई है अमावस,
चांदनी उसकी जो चाँद पाना सीख ले।
यूँ तो सभी आये है रोते हुए जहां में,
पर सारा जहां है उसी का जो मुस्कुराना सीख ले।
कुछ भी नजर न आये अंधेरों में रहकर,
रौशनी है उसी कि जो शमा जलना सीख ले।
हर गली में मंदिर हर राह में मस्जिद,
पर खुदा है उसी का जो सर झुकाना सीख ले।
हर सीने में दिल हर दिल में है प्यार,
सुख उसी को मिलता है जो दिल लगाना सीख ले।
लोगों का काफ़िला होगा हमेशा साथ उसके,
जो तहे दिल से रिश्ते निभाना सीख ले।
एक ख़ुशी कि तलाश में जिंदगी गुजर जाती है,
पास खुशियाँ उसे नसीब जो दूसरों के गम मिटाना सीख ले।
Saturday, September 3, 2011
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