अजब सा अन्तर है
पीढी दर पीढी के लोगों में
कोई कहता है कि
ज़माना बदल गया है
आरोपी तो मनुष्य है
क्योंकि
उसने ज़माने को बदल दिया।
कल तक माँ का दूध पीकर
बच्चों कि हड्डियां फौलाद बनती थी
लेकिन आज....
शराब पीकर माँ के दूध को
हड्डियों को पिघलाया जाता है
अजब तो तब लगता है
जब
मिट्टी कि सौंधी खुशबू
गाँव के अनजान, अंधेर भरे
टेढ़े- मेढ़े गलियारों से होकर
नुक्कड़ के पीछे की
वो पुरानी झोपडी देखता हूँ,
पता चलता है की
आज-कल
उस झोपडी का वजूद
विदेश कि किसी बड़ी
अट्टालिका में पल रहा है....
Tuesday, September 29, 2009
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