BLOGGER TEMPLATES AND TWITTER BACKGROUNDS »

Friday, May 22, 2009

मौन करुणा

" राम कुमार वर्मा "
मैं तुम्हारी मौन करुणा का सहारा चाहता हूँ।

जानता हूँ इस जगत में फूलों की है आयु कितनी
और यौवन से उभरती साँसों में है वायु कितनी,
इसलिए आकाश का विस्तार सारा चाहता हूँ
मैं तुम्हारी मौन करुणा का सहारा चाहता हूँ।

जोड़ कर कण- कण कृपण आकाश ने तारे सजाएं
जो की उज्जवल है सही पर क्या किसी के काम आए,
प्राण मैं तो मार्ग दर्शक बस एक तारा चाहता हूँ
मैं तुम्हारी मौन करुणा का सहारा चाहता हूँ।

यह उठा कैसा प्रभंजन जुड़ गई जैसे दिशाएँ
एक तरनी एक नाविक और कितनी आपदाएं,
संसार में सिर्फ़ मार्ग तुम्हारा चाहता हूँ
मैं तुम्हारी मौन करुणा का सहारा चाहता हूँ..

No comments:

Post a Comment