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Wednesday, May 20, 2009

मेरी गहराई को नापना यूँ आसान न होगा

जाने कितना टूटे ख्वाब दफ़न है इस गहराई में,

वक्त हो जाएगा पूरा ख़त्म किस्मत का

ज़िन्दगी बीत जायेगी इसकी खुदाई में.

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