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Saturday, January 30, 2010

मजबूरियाँ

मैं एक सफ़र पर था

और मेरे साथ

थी

मुझे कभी अकेला न छोड़ने वाली

मेरी तन्हाई...

सुनसान राह पर

उसने हमेशा एहसास दिलाया

कि

वो मेरे साथ है।

रास्ता बहुत लम्बा था,

मंजिल

नजर से कोसों दूर।

मन बहलाने के लिए

ये सोच लेता था कि

मुझसे अच्छा कोई नहीं,

क्योंकि...

इस राह पर

मैं अकेला था और कोई नहीं,

अजब सी मुश्किल में फस गया हूँ,

कि

मैं इस राह पर अकेला हूँ

या

मेरी तन्हाई भी है।

दोनों ही सूरत में...

अगर मैं अकेला हूँ,

तो खुद को धोखा दे रहा हूँ

और अगर

तन्हाई साथ है

तो भी

खुद को धोखा दे रहा हूँ,

कोई तो बताये,

मेरी मजबूरियों का हाल...

मैं खुद को बचा रहा हूँ

या

खुद से बच रहा हूँ....

1 comment:

  1. bahut khoob! touchy lines
    zindagee kee uljhan ko khoobsooratee se pesh karane ke lie badhai

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