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Saturday, January 30, 2010

ज्वालामुखी

अक्सर...
ऐसा होता है

कि

मैं चुप रहता हूँ

और लोग समझते है

कि

मैं कायर,

डरपोक, निहत्ता हूँ।

लेकिन...

मेरे अन्दर जो

सैलाब उबल रहा है,

जो लावा जल रहा है,

मैं उसे

पर्सुप्त रखना चाहता हूँ,

क्योंकि

मैं चाहता हूँ कि ये

ज्वालामुखी उनपर फटे

जिसना कायरता को

महान बनाया

और मुझ जैसे को

कायर इंसान बनाया...

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