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Wednesday, August 5, 2009

बारिश

वो जो दीवाना था
मासूम सा दीखता था
अपनी ही दर्द की अमीरी में
सुबह-शाम बिकता था।

आंसू का जाम छलकता
उसकी आंखों के पैमाने से
ख़ुद के अश्क में वो
तन-बदन भीगता था।

लोग कहते है की
उसकी कहानी पूरी हुई
पर हर
नकाबपोश चेहरे में
वो अक्सर मुझे दीखता था।

आज कलम कुछ बयान करे
वो समय भी आ गया था
टपक गए आंसू उसके मेरी आँख से
जब मैं उसके बारे मी लिखता था.

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